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धान खरीद घोटाले में लखीसराय DM मिथिलेश मिश्र हटाए गए

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बिहार सरकार ने लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र को धान खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप में हटाया। उनके स्थान पर एडीएम नीरज को डीएम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, जांच जारी।

लखीसराय/आलम की खबर: बिहार में प्रशासनिक हलकों में एक बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र को उनके पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई धान अधिप्राप्ति वर्ष 2025-26 के दौरान अतिरिक्त धान लक्ष्य के आवंटन में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद की गई है। प्रशासनिक विशेषज्ञ इस कदम को राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सख्ती का संकेत मान रहे हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को आदेश जारी कर मिथिलेश मिश्र को उनके पद से हटाया और फिलहाल उन्हें पटना स्थित विभाग में योगदान देने के लिए कहा गया। उनके स्थान पर एडीएम नीरज को डीएम का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस कदम से जिले में प्रशासनिक गतिविधियों और धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लोगों की निगाहें बढ़ गई हैं।

धान खरीद में अनियमितताओं का आरोप

जानकारी के अनुसार, लखीसराय जिले में धान खरीद का तय लक्ष्य 47,235 मीट्रिक टन था। इसके अतिरिक्त 8,000 मीट्रिक टन का अतिरिक्त लक्ष्य दिया गया था, जिसे वितरित करने में कथित अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं। सहकारिता विभाग ने प्रारंभिक जांच में पाया कि अतिरिक्त लक्ष्य का आवंटन नियमों के अनुसार नहीं किया गया और कई प्रक्रियागत गड़बड़ियां सामने आईं।

जांच के दौरान मिथिलेश मिश्र से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसे उन्होंने 24 मार्च 2026 को प्रस्तुत किया। हालांकि विभागीय समीक्षा में उनके दिए गए तर्क और अभिलेखीय तथ्य मेल नहीं खाते पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, उनके जवाब संतोषजनक नहीं थे, जिससे विभाग ने कदाचार की श्रेणी में इस मामले को रखा।

कदाचार और विभागीय कार्रवाई

सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले को अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के तहत कदाचार माना। इसके साथ ही अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसका मतलब है कि सरकार अब प्रशासनिक लापरवाही या अनियमितताओं के मामलों में गंभीर और त्वरित कदम उठा रही है।

डेढ़ साल का कार्यकाल और प्रशासनिक प्रभाव

मिथिलेश मिश्र सितंबर 2024 से लखीसराय के जिलाधिकारी के पद पर तैनात थे। करीब डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है। जिले में धान खरीद और सरकारी योजनाओं की निगरानी में यह घटना प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के महत्व को उजागर करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कदम यह संदेश देते हैं कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगी। अधिकारियों को चाहिए कि वे नियमों के अनुसार कार्य करें और किसी भी स्थिति में पारदर्शिता बनाए रखें।

आगे की संभावित कार्रवाई

विभागीय जांच अभी जारी है और इसमें कई अन्य पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि इस मामले में आगे और भी बड़े फैसले हो सकते हैं। आने वाले दिनों में धान खरीद में अतिरिक्त लक्ष्य के वितरण, प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका और अनियमितताओं की पूरी जांच सामने आ सकती है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अन्य जिलों के अधिकारियों को भी सतर्क रहने का संदेश मिलेगा। सरकारी संसाधनों का सही और पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि सभी अधिकारी नियमों का पालन करें।

निष्कर्ष

लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र को हटाने का निर्णय राज्य सरकार की स्पष्ट नीतियों और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रतीक है। यह घटना यह दर्शाती है कि सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कोई समझौता नहीं करेगी। धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्ध निष्पादन अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

विभागीय जांच के परिणाम और आगे की कार्रवाई राज्य में प्रशासनिक प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। जनता और अधिकारियों के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि सरकारी कार्यों में ईमानदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता अनिवार्य हैं।

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